Mandakini Ek Adhyayan (मन्दाकिनी एक अध्ययन)

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Dr. Neelam Singh - Hindi - Bharatiya Vidya Sansthan

Mandakini Ek Adhyayan (मन्दाकिनी एक अध्ययन)

मन्दाकिनी एक अध्ययन (Mandakini Ek Adhyayan) कहा जाता है कि जो व्यक्ति काल के विरुद्ध खड़ा होता है उसे चारो तरफ से गहरे आघात सहने पड़ते हैं। सम्पूर्ण अस्तित्व को मिटा देने वाले आघातों से जब वह अक्षत शेष रह जाता है तब सम्पूर्ण जनमानस इस अनुमान से उसकी तरफ दौड़ पड़ता है कि उसमें कुछ असाधारण अवश्य है। उसके विषय में नाना प्रकार की किंवदन्तियाँ बनने लगती हैं। निरन्तर वह असाधारण होता जाता है, यहाँ तक कि उसे ईश्वरीय अवतार भी मान लिया जाता है। हमारी मन्दाकिनीः एक सरल अध्ययन में समाहित कवि इसी तरह के व्यक्तित्व हैं, जो गौतम बुद्ध, महावीर आदि की तरह राजघराने की शक्ति सम्पन्नता तथा वैभव की पृष्ठभूमि नहीं रखते थे, एक नितान्त उपेक्षित तिरस्कृत परिवार की पृष्ठभूमि से उठकर धार्मिक व्यवस्था सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध अपनी जान को जोखिम में डालकर खड़े हो गये। कहा गया है कि जैसे पहाड़ी घाटी में तेज आवाज से चिल्लाने पर कुछ देर तक वाणी की प्रति ध्वनि गूंजती रहती है उसी तरह महान रचनाकार की वाणी जनता के हृदय-गुहा में ध्वनित, प्रतिध्वनित होती है, यह सिलसिला शताब्दियों तक चलता रहता है। बड़ा रचनाकार सिर्फ रचता नहीं बल्कि रचनात्मक क्षमता को उतेजित भी करता है।

Author : Dr. Neelam Singh

Publisher : Bharatiya Vidya Sansthan

Language : Hindi

Edition : 2014

Pages : 264

Cover : Paper Back

ISBN : 978-93-81189-31-3

Size : 14 x 2 x 22 ( l x w x h )

Weight : 

Item Code : BVS 0115

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